जीवाश्म ईंधन किसे कहते है, उत्पत्ति, लाभ, प्रभाव एवं नुकसान

163
jivashm indhan 2 (1)
jivashm indhan 2 (1)
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

जीवाश्म ईंधन क्या है?
जीवाश्म ईंधन करोड़ों वर्ष पहले मृत जीव-जंतुओं तथा वृक्षों के अवशेषों से बना प्राकृतिक ईंधन है। इसमें पेट्रोल, डीजल, एल.पी.जी., केरोसिन (मिट्टी का तेल), कोयला और प्राकृतिक गैस शामिल हैं।

उत्पत्ति:
करोड़ों वर्ष पूर्व प्राकृतिक आपदाओं के कारण जीव और वनस्पति पृथ्वी की गहराई में दब गए। धीरे-धीरे उन पर रेत की परतें जमती गईं। पृथ्वी के भीतर ऑक्सीजन की अनुपस्थिति, उच्च ताप और दाब के कारण ये अवशेष कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे ईंधनों में परिवर्तित हो गए। ये विभिन्न गहराइयों पर अलग-अलग परतों में पाए जाते हैं, क्योंकि अलग-अलग ताप और दाब के कारण इनकी संरचना में भिन्नता आती है।

जीवाश्म ईंधन के प्रकार:

  1. कोयला: कठोर, काले रंग का पदार्थ जो लाखों साल पहले घने जंगलों के धरती में दबने और उच्च तापमान व दबाव के कारण बना। इसका उपयोग कारखानों, खाना बनाने और थर्मल प्लांटों में बिजली पैदा करने के लिए होता है।

  2. पेट्रोलियम: तैलीय तरल, आमतौर पर हरे या काले रंग का। समुद्री जानवरों और पौधों के मरने व समुद्र में दबने से बनता है। इसका उपयोग पेट्रोल के रूप में इंजनों को शक्ति प्रदान करने के लिए किया जाता है।

  3. प्राकृतिक गैस: रंगहीन, गंधहीन और स्वच्छ जीवाश्म ईंधन। 90-160 डिग्री सेल्सियस तापमान पर केरोजेन से बनता है। इसे पाइपलाइनों से आसानी से ट्रांसफर किया जा सकता है। उपयोग: बिजली उत्पादन, ऑटोमोबाइल ईंधन, घरों में खाना पकाना।

जीवाश्म ईंधन का प्रभाव:
ये ऊर्जा के अमूल्य भंडार हैं जिनका मानव निरंतर उपयोग कर रहा है। बढ़ती जनसंख्या और बदलती जीवनशैली के कारण इनका अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे प्रदूषण (जल, वायु) और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।

जीवाश्म ईंधन के लाभ:

  • एक ही स्थान पर अधिक मात्रा में बिजली उत्पादन संभव।

  • लागत कम होती है।

  • तेल और गैस का पाइपलाइनों से आसान परिवहन।

  • समय के साथ सुरक्षित (प्रौद्योगिकी के संदर्भ में)।

  • प्रचुर मात्रा में उपलब्ध (हालांकि सीमित)।

जीवाश्म ईंधन के नुकसान:

  • जलने से वायु प्रदूषण (कार्बन, नाइट्रोजन, सल्फर के ऑक्साइड)।

  • मिट्टी की उर्वरता और पीने योग्य पानी प्रभावित।

  • कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से ग्लोबल वार्मिंग।

पर्यावरणीय प्रभाव:
निजी वाहनों और यातायात में अत्यधिक उपयोग से वायु प्रदूषण और तापमान में वृद्धि होती है, जिससे बर्फ पिघलती है और पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है। यदि वर्तमान दर से खपत जारी रही, तो ये भंडार 21वीं सदी के मध्य तक समाप्त हो सकते हैं, जिससे उद्योग-धंधे ठप हो सकते हैं।

भारत में जीवाश्म ईंधन:
आधुनिकीकरण और शहरीकरण के साथ, भारत जीवाश्म ईंधन और अन्य ऊर्जा स्रोतों पर अधिक निर्भर हो गया है, जबकि पहले बायोमास और कचरे का उपयोग अधिक था।

यह लेख जीवाश्म ईंधन की उत्पत्ति, प्रकार, लाभ, हानि और पर्यावरणीय प्रभावों पर विस्तृत जानकारी प्रदान करता है, साथ ही भविष्य में इनके समाप्त होने की चिंता भी व्यक्त करता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here