पौधों की अच्छी सेहत का राज़: जानिए पोषक तत्वों के कार्य और कमी के लक्षण
हम सभी जानते हैं कि हमारे हरे-भरे पौधों को फलने-फूलने और अच्छी उपज देने के लिए खाद और उर्वरक की आवश्यकता होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये पोषक तत्व वास्तव में पौधों के विकास में कैसे मदद करते हैं? कौन से तत्व उनके लिए अनिवार्य हैं? आइए, इस लेख में पौधों के लिए ज़रूरी पोषक तत्वों, उनके अद्भुत कार्यों और उनकी कमी से पौधों पर दिखने वाले लक्षणों को विस्तार से समझते हैं।
पौधों के जीवनदायी पोषक तत्व
पौधों को सर्वोत्तम रूप से विकसित होने और भरपूर उत्पादन करने के लिए कुछ विशेष तत्वों या यौगिकों की आवश्यकता होती है, जिन्हें हम पादप पोषक तत्व (Plant Nutrients) कहते हैं।
ये पोषक तत्व पौधों की सामान्य वृद्धि और विकास के लिए अनिवार्य हैं। कुछ पोषक तत्वों की पौधों को अधिक मात्रा में ज़रूरत होती है, जिन्हें वृहत् पोषक तत्व (Macronutrients) कहा जाता है। वहीं, कुछ पोषक तत्वों की बहुत सूक्ष्म मात्रा ही काफी होती है, जिन्हें सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) या ट्रेस तत्व के रूप में जाना जाता है। यदि इनमें से कोई भी आवश्यक तत्व पौधे को उपलब्ध नहीं हो पाता, तो उसकी कमी के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं।
आवश्यकता के आधार पर पोषक तत्वों को मुख्यतः इन भागों में बांटा गया है:
1. प्राथमिक वृहत् पोषक तत्व (Primary Macronutrients)
इनकी पौधों को स्वस्थ विकास के लिए सबसे अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है। ये हैं:
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नाइट्रोजन (N)
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फास्फोरस (P)
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पोटेशियम (K)
2. द्वितीयक वृहत् पोषक तत्व (Secondary Macronutrients)
प्राथमिक पोषक तत्वों की तरह ये भी पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इनकी आवश्यकता थोड़ी कम मात्रा में होती है। ये हैं:
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कैल्शियम (Ca)
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मैग्नीशियम (Mg)
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सल्फर (S)
3. सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients या Trace Elements)
पौधों को इन तत्वों की बहुत कम मात्रा में ज़रूरत होती है, लेकिन इनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ये हैं:
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जिंक (Zn)
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लोहा (Fe)
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मैंगनीज (Mn)
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मोलिब्डेनम (Mo)
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कॉपर (Cu)
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बोरॉन (B)
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क्लोरीन (Cl) (मूल लेख में क्लोरीन का उल्लेख बाद में था, इसे यहीं वर्गीकृत करना बेहतर है)
पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व: कार्य और कमी के लक्षण
यदि किसी पौधे में किसी आवश्यक पोषक तत्व की कमी हो जाए, तो वह अपना जीवन चक्र ठीक से पूरा नहीं कर पाता। बीज अंकुरित होने में समस्या, जड़ों, तनों, पत्तियों या फूलों का सही विकास न हो पाना और गंभीर स्थितियों में पौधे की मृत्यु भी हो सकती है। आइए, जानते हैं इन पोषक तत्वों के प्रमुख कार्य और उनकी कमी के लक्षण:
नाइट्रोजन (N)
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कार्य: पौधों की मज़बूत और तेज़ वृद्धि, पत्तियों का गहरा हरा रंग और प्रकाश संश्लेषण के लिए यह प्रमुख तत्व है। पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, सलाद और घास को इसकी भरपूर ज़रूरत होती है।
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कमी के लक्षण: पुरानी पत्तियाँ हल्की हरी या पीली पड़ने लगती हैं और गिरने लगती हैं।
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अधिकता के नुकसान: अधिक नाइट्रोजन से अंकुर मुरझा सकते हैं, युवा पत्तियों पर मृत धब्बे दिख सकते हैं। नरम, गहरे हरे पत्ते कीटों और रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
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जैविक स्रोत: गोबर की खाद, नीम केक, ब्लड मील, सरसों की खली।
फास्फोरस (P)
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कार्य: मुख्य रूप से जड़ों की वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है। यह फूलों की संख्या बढ़ाता है और फलों को बेहतर व तेज़ी से पकने में मदद करता है। नए लगाए गए पेड़ों और झाड़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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कमी के लक्षण: जड़ों का विकास रुक जाता है, पौधे बौने रह जाते हैं, पत्तियों में बैंगनी रंगत दिखाई देने लगती है। फल और बीज अच्छी गुणवत्ता के नहीं होते।
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जैविक स्रोत: बोन मील, रॉक फॉस्फेट, वर्मीकम्पोस्ट।
पोटेशियम (K)
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कार्य: पौधे के समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है और तापमान के उतार-चढ़ाव को सहने की क्षमता बढ़ाता है। रोगों से लड़ने में मदद करता है, कोशिकाओं को मज़बूत बनाता है और पानी के संचरण में सहायक है।
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कमी के लक्षण: पौधा ठंड के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है, तने कमज़ोर हो जाते हैं। पुरानी पत्तियों के किनारे भूरे होकर झुलसे हुए दिखाई देते हैं। बीज और फल सिकुड़े हुए होते हैं। रेतीली और अधिक वर्षा वाली मिट्टी में इसकी कमी आम है।
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जैविक स्रोत: वर्मीकम्पोस्ट, नीम की खली, लकड़ी की राख, पोटाश उर्वरक।
कैल्शियम (Ca)
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कार्य: पौधे की कोशिकाओं को मज़बूती देता है और कोशिका भित्ति के निर्माण में मदद करता है। युवा जड़ों के अच्छे विकास को बढ़ावा देता है।
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कमी के लक्षण: कोशिकाएं कमज़ोर होने से पौधे का संवहन तंत्र प्रभावित होता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण कम हो जाता है। यह लक्षण सबसे पहले टहनियों और जड़ों के बढ़ते सिरों पर दिखते हैं। नई पत्तियां विकृत होकर मुरझाने लगती हैं, उन पर मृत धब्बे बन जाते हैं। अत्यधिक अम्लीय मिट्टी में इसकी कमी हो सकती है।
मैग्नीशियम (Mg)
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कार्य: बीज निर्माण में सहायक और क्लोरोफिल का एक महत्वपूर्ण घटक है, इसलिए पौधों के हरे रंग और प्रकाश संश्लेषण के लिए ज़रूरी है। यह शर्करा, प्रोटीन, तेल और वसा के निर्माण में तथा फास्फोरस जैसे अन्य पोषक तत्वों के अवशोषण को नियंत्रित करने में मदद करता है।
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कमी के लक्षण: पुरानी पत्तियों की शिराओं के बीच धब्बेदार पीलापन आ जाता है, जबकि शिराएं हरी रहती हैं। पत्तियां लाल-बैंगनी हो सकती हैं और बीज उत्पादन कम हो सकता है। पत्तियाँ पतली, भंगुर और जल्दी गिर सकती हैं। अधिक जल निकासी वाली रेतीली मिट्टी या जहाँ N और K का स्तर उच्च हो, वहां इसकी कमी की संभावना अधिक होती है।
सल्फर (S)
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कार्य: पौधों में गहरा हरा रंग बनाए रखने और जोरदार वृद्धि को प्रोत्साहित करने में मदद करता है। क्लोरोफिल निर्माण के लिए आवश्यक है। महत्वपूर्ण एंजाइम बनाने और प्रोटीन निर्माण में सहायता करता है। मिट्टी के कंडीशनर के रूप में भी कार्य करता है और कुछ सब्जियों (जैसे प्याज, लहसुन) को उनका विशिष्ट स्वाद देता है।
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कमी के लक्षण: पौधे की वृद्धि धीमी हो जाती है, पौधे छोटे और नुकीले (स्पिंडली) दिखते हैं, और परिपक्वता में देरी होती है।
बोरॉन (B)
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कार्य: कोशिका विकास में मदद करता है और पौधे के चयापचय को नियंत्रित करता है। प्रोटीन संश्लेषण, कोशिका भित्ति विकास, कार्बोहाइड्रेट चयापचय और बीज विकास के लिए आवश्यक है।
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कमी के लक्षण: पत्तियां मोटी, मुड़ी हुई, मुरझाई हुई और क्लोरोटिक (रंगहीन) हो जाती हैं। फलों और कंदों में नरम धब्बे, कम फूल आना या अनुचित परागण हो सकता है। अधिक मात्रा में यह विषाक्त हो सकता है।
क्लोरीन (Cl)
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कार्य: प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण घटक है और पौधों को रोगों से बचाता है। रंध्रों (स्टोमेटा) के माध्यम से गैसों के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण है।
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कमी के लक्षण: प्रकाश संश्लेषण बाधित होता है, जिससे पौधे का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
कॉपर (Cu)
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कार्य: पौधों में एंजाइम को सक्रिय करता है जो लिग्निन संश्लेषण में मदद करते हैं। लिग्निन प्रकाश संश्लेषण का हिस्सा है और कुछ सब्जियों में स्वाद व फूलों में रंग प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है।
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कमी के लक्षण: नई पत्तियाँ मुड़ने लगती हैं और शिराओं के बीच क्लोरोसिस (पीलापन) दिखाई देता है। गंभीर कमी में पत्तियां सूखकर गिर सकती हैं। लीफ नोड्स पास-पास उगने से पौधा बौना दिख सकता है।
आयरन (Fe)
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कार्य: क्लोरोफिल निर्माण और कई जैव रासायनिक प्रक्रियाओं से संबंधित है। एंजाइम और क्लोरोफिल उत्पादन, नाइट्रोजन स्थिरीकरण, पौधे की वृद्धि और चयापचय के लिए आवश्यक है।
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कमी के लक्षण: सबसे स्पष्ट लक्षण लीफ क्लोरोसिस है, जिसमें पत्तियां पीली हो जाती हैं, लेकिन शिराएं हरी रहती हैं। यह आमतौर पर नई पत्तियों से शुरू होता है। खराब वृद्धि और पत्ती झड़ना अन्य लक्षण हैं।
मैंगनीज (Mn)
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कार्य: क्लोरोफिल का हिस्सा नहीं है, लेकिन प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में शामिल होता है।
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कमी के लक्षण: मैग्नीशियम की कमी के समान, लेकिन ये लक्षण सबसे पहले नई पत्तियों पर दिखाई देते हैं। पत्तियाँ पीली हो जाती हैं और इंटरवेइनल क्लोरोसिस हो सकता है।
मोलिब्डेनम (Mo)
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कार्य: पौधों को नाइट्रोजन का उपयोग करने में मदद करता है। मिट्टी से लिए गए नाइट्रेट्स को प्रोटीन में बदलने में पौधे को सक्षम बनाता है।
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कमी के लक्षण: नाइट्रेट्स पत्तियों में जमा हो जाते हैं और पौधा प्रोटीन नहीं बना पाता, जिससे नाइट्रोजन की कमी जैसे लक्षण दिखते हैं और विकास रुक जाता है। पत्तियों के किनारे झुलस सकते हैं।
जिंक (Zn)
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कार्य: एंजाइम और हार्मोन के विकास में उपयोग होता है। क्लोरोफिल बनाने में मदद करता है और बीज निर्माण के लिए फलियों द्वारा इसकी आवश्यकता होती है।
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कमी के लक्षण: पौधे की वृद्धि रुक जाती है, पत्तियां मुरझा जाती हैं। क्लोरोसिस (शिराओं के बीच पीलापन) होता है, जो आमतौर पर तने के पास पत्ती के आधार से निचली पत्तियों पर शुरू होता है और फिर ऊपर की ओर बढ़ता है। अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से इसके लक्षणों को पहचानना मुश्किल हो सकता है, मुख्य अंतर यह है कि जिंक की कमी से क्लोरोसिस निचली पत्तियों पर शुरू होता है।
कैसे जानें कि मिट्टी को किस खाद की ज़रूरत है?
पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए सभी पोषक तत्वों का सही संतुलन आवश्यक है। मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) इसका सबसे अच्छा तरीका है। अपनी मिट्टी का नमूना एक विश्वसनीय प्रयोगशाला में भेजें। रिपोर्ट के आधार पर आपको पता चल जाएगा कि आपकी मिट्टी में किन पोषक तत्वों की कमी है और आपकी फसल के लिए कौन सा उर्वरक सबसे उपयुक्त रहेगा।
पौधों को समझना और उनकी ज़रूरतों को पूरा करना एक पुरस्कृत अनुभव है। इन पोषक तत्वों की जानकारी से आप अपने बगीचे को और भी हरा-भरा और उत्पादक बना सकते हैं!









