मटके का पानी पीने के फायदे और नुकसान

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गर्मियों का अमृत: मटके का पानी पीने के चमत्कारी फायदे और जरूरी बातें

तपती गर्मी में जब गला सूखता है, तो ठंडे पानी से बेहतर कुछ नहीं लगता। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फ्रिज के पानी की जगह मिट्टी के मटके (घड़े या सुराही) का पानी पीना सेहत के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है? जी हाँ, हमारी पृथ्वी विभिन्न विटामिन और खनिजों से समृद्ध है, और मिट्टी के बर्तनों में भी धरती के यही गुण समाए होते हैं। हमारे पूर्वजों को इन गुणों का ज्ञान था, इसीलिए वे मिट्टी के बर्तनों का ही प्रमुखता से उपयोग करते थे। आज भी कई घरों में इस पारंपरिक तरीके को अपनाया जाता है और फ्रिज की बजाय मटके में पानी रखना पसंद किया जाता है।

आइए, विस्तार से जानते हैं मटके का पानी पीने के अद्भुत स्वास्थ्य लाभ और कुछ जरूरी बातों के बारे में।

विषय सूची

  1. मटके का पानी ठंडा क्यों होता है – कुदरत का एयर कंडीशनर!

  2. गले के लिए अमृत – मटके का पानी

  3. शरीर का पीएच संतुलन बनाए – मटके के पानी का क्षारीय गुण

  4. पाचन शक्ति बढ़ाए – मटका वाटर के फायदे

  5. लू से बचाए – मटके के पानी का सुरक्षा कवच

  6. उपचारात्मक गुणों से भरपूर – मिट्टी के बर्तन का जादू

  7. हानिकारक रसायनों से मुक्ति – घड़े का शुद्ध पानी

  8. एसिडिटी से राहत – मटके के पानी का कमाल

  9. किफायती और टिकाऊ – प्लास्टिक बोतलों से बेहतर विकल्प

  10. पर्यावरण का दोस्त – मिट्टी के बर्तन

  11. मटके का पानी पीते समय ध्यान रखने योग्य बातें


1. मटके का पानी ठंडा क्यों होता है – कुदरत का एयर कंडीशनर!

मिट्टी के बर्तन, जिन्हें हम मटका या घड़ा कहते हैं, प्राकृतिक रूप से छिद्रपूर्ण (porous) होते हैं। जब मटके में पानी रखा जाता है, तो इन सूक्ष्म छिद्रों से पानी का धीरे-धीरे वाष्पीकरण (evaporation) होता है। इस प्रक्रिया में पानी के कण मटके की सतह से गर्मी सोखते हैं, जिससे अंदर का पानी ठंडा हो जाता है। यह प्रक्रिया ठीक वैसी ही है जैसे हमें पसीना आने पर ठंडक महसूस होती है। यह न केवल पानी को ठंडा करता है, बल्कि मिट्टी के प्राकृतिक गुण भी पानी में मिल जाते हैं। खास बात यह है कि मटका मौसम के अनुसार पानी को ठंडा करता है – न बहुत ज्यादा, न बहुत कम। यह खूबी किसी और बर्तन में नहीं मिलती।

2. गले के लिए अमृत – मटके का पानी (Treats bad throat)

गर्मियों में अक्सर लोग फ्रिज का बर्फीला पानी पीते हैं, जिससे गले में खराश या अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसके विपरीत, मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और इसका तापमान गले के लिए एकदम सही होता है। यह गले को आराम पहुंचाता है और खांसी-जुकाम से पीड़ित लोगों के लिए भी यह एक बेहतरीन विकल्प है। यह प्यास बुझाने के साथ-साथ गले को भी कोमल रखता है।

3. शरीर का पीएच संतुलन बनाए – मटके के पानी का क्षारीय गुण (Alkaline in nature)

मिट्टी की प्रकृति क्षारीय (alkaline) होती है। जब पानी मटके में रखा जाता है, तो यह पानी के अम्लीय (acidic) गुणों को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे हमारे शरीर का पीएच संतुलन बना रहता है। माना जाता है कि मानव शरीर की प्रकृति कुछ अम्लीय होती है, ऐसे में क्षारीय पानी पीने से एसिडिटी और पेट से जुड़ी कई समस्याओं (gastronomic pains) में राहत मिल सकती है।

4. पाचन शक्ति बढ़ाए – मटका वाटर के फायदे (Benefits for digestion)

प्लास्टिक की बोतलों में पाए जाने वाले BPA जैसे हानिकारक रसायनों के बिना, मिट्टी के बर्तन का पानी पीना हमारे चयापचय (metabolism) को बढ़ावा दे सकता है। यह शरीर में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को भी संतुलित रखने में सहायक हो सकता है, जो प्लास्टिक के संपर्क में आने से बिगड़ सकता है। मटके के पानी में मौजूद खनिज पदार्थ पाचन क्रिया को सुधारने में भी मदद करते हैं। चूँकि यह पानी किसी भी प्रकार के रासायनिक घटकों के संपर्क में नहीं आता, यह शरीर की प्राकृतिक चयापचय प्रणाली को सुचारू रखता है।

5. लू से बचाए – मटके के पानी का सुरक्षा कवच (Prevents sun strokes)

गर्मियों में लू लगना एक आम समस्या है। मटके का पानी पीकर आप इससे काफी हद तक बच सकते हैं। यह शरीर को जरूरी पोषक तत्व और विटामिन प्रदान करता है, जो शरीर में ग्लूकोज के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं और हमें गर्मी के थपेड़ों और लू से बचाते हैं। यदि आप अभी तक मटके का उपयोग नहीं कर रहे हैं, तो इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने पर विचार करें। ध्यान रहे, मटके को हर 2-3 दिन में अच्छी तरह साफ करके ताजा पानी भरें।

6. उपचारात्मक गुणों से भरपूर – मिट्टी के बर्तन का जादू (Healing properties)

यह जानकर आपको आश्चर्य हो सकता है कि मिट्टी के बर्तनों में उपचारात्मक (healing) गुण भी होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि मटके बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली मिट्टी में विभिन्न प्रकार के खनिज और तत्व होते हैं। जब पानी इन बर्तनों में संग्रहित किया जाता है, तो मिट्टी के ये सूक्ष्म पोषक तत्व पानी में मिल जाते हैं और हमारे शरीर को लाभ पहुंचाते हैं।

7. हानिकारक रसायनों से मुक्ति – घड़े का शुद्ध पानी (Absence of Toxic chemicals)

मटके का पानी पीने का एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक रसायन, जैसे कि प्लास्टिक की बोतलों में पाया जाने वाला BPA (बिस्फेनॉल ए), नहीं होता। BPA एक जहरीला रसायन है जो अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine system) को नुकसान पहुंचा सकता है। मिट्टी के बर्तनों में पानी रखने से यह सुनिश्चित होता है कि पानी शुद्ध और किसी भी प्रकार के रासायनिक संदूषण से मुक्त है।

8. एसिडिटी से राहत – मटके के पानी का कमाल (Great cure for acidity)

जैसा कि पहले बताया गया है, मिट्टी के बर्तन पानी के पीएच स्तर को संतुलित करने में मदद करते हैं। इस गुण के कारण, यह गैस्ट्रिक और एसिडिटी से संबंधित समस्याओं को रोकने और उनसे राहत दिलाने में बेहद प्रभावी है। यह आपके और आपके परिवार के बुजुर्ग सदस्यों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है।

9. किफायती और टिकाऊ – प्लास्टिक बोतलों से बेहतर विकल्प (Cheaper than plastic bottles)

अगर मिट्टी के बर्तनों को ठीक से साफ और सुरक्षित रखा जाए, तो वे कई सालों तक चल सकते हैं। इसके अलावा, ये पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल होते हैं, जबकि प्लास्टिक की बोतलें अक्सर एक बार इस्तेमाल के बाद फेंक दी जाती हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। लंबे समय तक उपयोग को देखते हुए, मिट्टी के बर्तन प्लास्टिक की बोतलों की तुलना में काफी सस्ते साबित होते हैं।

10. पर्यावरण का दोस्त – मिट्टी के बर्तन (Eco-friendly option)

आज के समय में पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को अपनाना बहुत जरूरी है। हममें से ज्यादातर लोग प्लास्टिक की बोतलों में पानी रखते हैं, जो आसानी से विघटित (decomposed) नहीं होतीं और जिनमें हानिकारक रसायन भी हो सकते हैं। इससे भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा जमा होता है। मिट्टी के बर्तन पूरी तरह से प्राकृतिक, जैविक (organic) और पर्यावरण के लिए एक बेहतरीन विकल्प हैं।

11. मटके का पानी पीते समय ध्यान रखने योग्य बातें (Precautions)

वैसे तो मटके का पानी पीने के कोई ज्ञात नुकसान नहीं हैं, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है ताकि आपको इसका पूरा लाभ मिल सके:

  • नियमित सफाई: अपने मटके को साफ और रोगाणु मुक्त रखें। मिट्टी के बर्तन पानी सोख सकते हैं और मैल जमा कर सकते हैं। हर बार नया पानी भरने से पहले और प्रत्येक उपयोग के बाद मटके को अच्छी तरह साफ करना और सुखाना सबसे अच्छा है।

  • सही बर्तन का चुनाव: बाजार में विभिन्न आकार के मिट्टी के बर्तन उपलब्ध हैं। एक छोटी सुराही को संभालना आसान हो सकता है, जबकि एक बड़े मटके या घड़े को इधर-उधर ले जाना मुश्किल हो सकता है। अपनी जरूरत के अनुसार चुनाव करें।

  • ढककर रखें: मटके को हमेशा ढककर रखें ताकि उसमें कीड़े, धूल या अन्य दूषित पदार्थ न गिरें।

  • सही स्थान: मटके को किसी मजबूत मेज पर या खिड़की के पास रखें जहाँ थोड़ी हवा आती हो। हवा पानी को ठंडा रखने में मदद करेगी। अधिक ठंडक के लिए, गर्मी के महीनों में आप मटके के चारों ओर एक साफ, गीला कपड़ा लपेट सकते हैं।

  • पानी निकालने का तरीका: मटके से पानी निकालने के लिए एक साफ, लंबे हैंडल वाले कलछुल या लोटे का प्रयोग करें। गिलास को सीधे डुबोने या हाथ से पानी छूने से वह दूषित हो सकता है।

तो, इस गर्मी में फ्रिज के पानी को अलविदा कहें और मिट्टी के मटके के शीतल और स्वास्थ्यवर्धक जल का आनंद लें! यह न केवल आपकी प्यास बुझाएगा बल्कि आपको कई स्वास्थ्य लाभ भी देगा।

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